गुरुवार, 25 मार्च 2010

बच्चन की तो भद पिट गई


भई आज तो घर से नहा धो कर निकले थे...फिर चूक कहां हो गई...आज तो मां के दर्शन भी किए थे...फिर भी...अमां निकले ही क्यों थे...नहीं निकलते, तो काम नहीं चलता क्या (वैसे भी हाथ में बहुत फिल्में तो हैं नहीं)...खामखां इस भद पिटाई से तो बच जाते....
यही सोच रहे होंगे...सदी के महानायक और बॉलीवुड के शहंशाह...अमिताभ बच्चन...
मुंबई में बांद्रा-वर्ली सी लिंक के दूसरे चरण के उद्घाटन में मुख्य अतिथि बनने के लिए जब अमिताभ को आमंत्रित किया गया, तो किसी को रत्तीभर भी इस बात की भनक नहीं थी कि अगले कुछ-एक घंटे में क्या कुछ होने वाला है...और मिस्टर बच्चन के लिए तो यह चार दशकों में संभवतः कदाचित पहला मौका था...मुंबई सरकार के किसी भी आयोजन में अतिथि बनकर पहुंचने का...सबकुछ बढ़िया-बढ़िया चल रहा था...चैनलों में खबरें लिखी जानें लगीं कि...'फिर से बच्चन और गांधी परिवार में नजदीकियां बढ़ने लगीं'...' यह सी लिंक नहीं दोस्ती का लिंक है' वगैरह-वगैरह.....अभी यह सब रिहर्सल चल ही रहा था कि महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष (जिनको टीवी और टीवी को वे बहुत रास आते हैं) ने सब गुड़ गोबर कर दिया...मोर्चा खोल दिया...कि किसने बुलाया अमिताभ को...मेरी राय नहीं ली गई..

उधर, बहुत सारे ऐसे लोग भी थे, जो इसी ताक में थे कि कोई आगे आकर भाड़ में सिर डाले, बस वे भी शुरू हो गए...
अब तो जैसे तमाशा बन गया...दिल्ली से महाराष्ट्र तक में कांग्रेस में खलबली मच गई कि 'किसने बुलाया' तो 'किसने बुलाया'
अजी, कोई भी बुलाए, अमिताभ इतने बड़े अभिनेता हैं, बिन बुलाए तो पहुंचेंगे नहीं...आलम यह था कि सीएम साहब भी रट लगाने लगे...मुझे तो पता ही नहीं था कि कार्यक्रम में अमिताभ आने वाले हैं (जाने क्या सोचकर कांग्रेस ने ऐसे शख्स को सीएम बनाया, जिसे कुछ पता ही नहीं रहता)...
बन गया पूरा माहौल, शुरू हो गया आरोप-प्रत्यारोप का दौर...और इन सब के बीच में शालीनता से बैठा एक शख्स (बच्चन) यह सोच रहा था...कि भैया बहुत खूब, कमबख्त घर बुलाकर बेइज्जत करने के लिए हम ही मिले थे...
हद तो तब हो गई जब समारोह में उपस्थित राज्य के मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण कहते हैं कि 'मैं तो...समारोह में अमिताभ बच्चन को देखकर शॉक्ड हो गया'...
दरअसल, दोपहर तक जनपथ इस बात से अंजान रहा कि बोफोर्स मामले के समय साथ छोड़ने वाला, उनकी पार्टी शासित राज्य में किसी सरकारी टाइप के कार्यक्रम में मुख्य अतिथि बनने वाला है...ऊपर से यह वही शख्स है जिसे गुजरात (भाजपा शासित) ने अपना ब्रांड एम्बेस्डर बनाया है...एक दर्द और भी तो था...ये वही अमिताभ है, जो उस वक्त किसी स्वयंभू ठाकरे के घर जाकर अपनी फिल्म दिखा रहा था, जब युवराज की महाराष्ट्र यात्रा के विरोध में ठाकरे के गुर्गो गला फाड़ रहे थे...

अब इतना सब के बाद भी एंग्री यंग मैन को अपनी दशकों पुरानी दोस्ती याद आ गई, तो भैया गलती हमारी तो नहीं ही है...

आलोक साहिल

2 टिप्‍पणियां:

rashmi ने कहा…

bahut kar-kar lkar rahe the...sahi huaa...aap abhineta hain to abhineta hi rahiye...neta banne ki koshish karenge to aisi hi ghatnayein pesh aayengi..
halanki vyaktigat taur par mujhe is ghatna se aghaat pahuncha hai...lekin galati bachchan ki bhi kam nahin hai...
baat alag hai ki aaj unki galati nahin dikhati...yah sab unke abhi tak ke kiye karmon ka prasad hai..

चन्दन कुमार ने कहा…

bachchhan bechare budhape ke shikar ho rahe hain. laekin ye mumkin nahi hai bachchhan khud ba khud vaha gaye ho. kisi ne bulaya tabhi gaye. aise me mh sarkar ko khaskar cogress ko sochna chahiye ko shivsena aur mns ke bad vah tamasha khadi kr rahi hai