गुरुवार, 13 मई 2010

पत्नियों के साथ रात बिताने हक...


पाकिस्तान...जिसका नाम आते ही जेहन में बेहद दकियानुसी और फिल्मों एवं मीडिया की बदौलत बनी एक स्टीरियोटाइप तस्वीर सामने आने लगती है...लेकिन इसबार कुछ अलग और दिलचस्प मामला है...माजरा ऐसा कि सुनकर यकायक यकीन नहीं होगा कि यह ख़बर पाकिस्तान से आई है...जी हां, पाकिस्तान के सिंध प्रांत की सरकार ने क़ैदियों को उनकी पत्नियों से जेल के भीतर मिलने और रात गुजारने की सुविधा देने की घोषणा की है और बाकायदा इसकी व्यवस्था करने के लिए जेल अधिकारियों को आदेश भी दिया है.
पाकिस्तान की स्टेट होम मिनिस्ट्री ने इस संबंध में एक अधिसूचना जारी की है, जिसमें कहा गया है कि सिंध प्रांत की जेलों में क़ैद पुरूषों की पत्नियां अब उनके साथ हर 3 महीने के बाद जेल की भीतर एक रात बिता सकती हैं…
जेल अधिकारियों का आदेश दिया गया है कि जेल के भीतर क़ैदियों और उनकी पत्नियों के मिलने के लिए एक जगह की व्यवस्था की जाए...साथ ही उनकी गोपनीयता का भी ध्यान रखा जाए.
अधिसूचना के अनुसार 5 साल या उससे अधिक की सज़ा वाले क़ैदी इस सरकारी राहत से लाभ उठा सकते हैं...जो क़ैदी इस सुविधा का लाभ लेना चाहते हैं, उन्हें सबसे पहले जेल के अधीक्षक के समक्ष अपना निकाहनामा प्रस्तुत करना होगा...
अधिसूचना में कहा गया है कि अगर किसी क़ैदी की 2 पत्नियाँ हैं तो उन्हें अलग अलग समय दिया जाएगा, जबकि महिलाएं अपने साथ 6 साल की उम्र तक के बच्चों को भी ला सकती हैं...ये तो बल्ले-बल्ले है जी.
लेकिन ऐसा नहीं कि सभी क़ैदियों को यह सुविधा मिलने वाली है...पहली बंदिश तो 5 साल से अधिक की क़ैद होना है, दूसरी यह है कि संबंधित क़ैदी आतंकवाद के मामले में लिप्त न हो...या उस पर इससे संबंधित कोई मुकदमा न चल रहा हो.
खैर, एक तरफ जहां इस सुविधा को वाज़िब और लोकहित में बताया जा रहा है, वहीं सिंध के जेल अधीक्षकों के कान खड़े हो गए हैं...सरकार का क्या है...घोषणा तो सरकार ने कर दी, लेकिन मूर्त रूप तो उन्हें ही देना...ग़ौरतलब है कि सिंध प्रांत की 20 जेलों में 14 हज़ार के करीब क़ैदी बंद हैं...जबकि इन जेलों में 10 हज़ार क़ैदियों के रखने की ही जगह है...यानी एक तो पहले से ही सुपर हाउसफुल है...ऊपर से जब बीवी और बच्चों वाली बात आएगी, तो उनकी व्यवस्था कैसे की जाएगी...वह भी निहायत ही पोशीदा तरीके से...और तुर्रा ये कि इनमें से 75 फीसदी क़ैदियों के मुक़दमे अदालतों में चल रहे हैं.
हाल ही में अदालत ने अपने एक फैसले में कहा था कि शादीशुदा क़ैदी को अपनी पत्नी से मिलना का पूरा अधिकार है और यह सुविधा उसे जेल के भीतर दी जानी चाहिए...अदालत का कहना था कि क़ैदी अपनी पत्नी से न मिलने की वजह से मानसिक बीमारी का भी शिकार होते हैं और अक्सर नशीले पदार्थों का सेवन करते हैं...यहां एक बात गौर करने वाली है कि जब क़ैदी जेल के अंदर हैं, तो उन्हें नशीले पदार्थ कहां से उपलब्ध होते हैं...यानी प्रशासन और व्यवस्था...अनचाहे और अप्रत्यक्ष रूप से यह भी मानती है कि उनकी जेलों में हिंदुस्तान की जेलों की ही तरह सबकुछ दुरुस्त है (खासकर बेऊर जैसी जेलों की तरह, जहां उत्कृष्ट किस्म के साहित्य से लेकर गुब्बारे और भी जाने क्या-क्या उपलब्ध होते रहते हैं)
इससे पहले भी 2005 में, पाकिस्तान के पश्चिमोत्तर सीमांत प्रांत की सरकार ने एक अधिसूचना जारी कर क़ैदियों को जेल के भीतर साल में 3 दिन अपनी पत्नियों के साथ रहने की अनुमति दी थी, जिसका व्यापक स्तर पर स्वागत किया गया था...यानी पश्चिमोत्तर प्रांत से चली ये बयार अभी दूर तलक जाएगी...अब तो भारत के क़ैदियों की भी यही तमन्ना है कि काश ! ये बयार भारतीय सरहद में दाखिल हो जाए.

आलोक साहिल

4 टिप्‍पणियां:

rashmi ने कहा…

शानदार पहल। भारत को भी इससे सीख लेनी चाहिए।

चन्दन कुमार ने कहा…

qaidi, sex aur saza. hum khamo khan pareshan hote hain pakistan ke liye vah hum se kam pragatisheel matlab soch me, manane lagte hai.

Husain ने कहा…

इससे पहले भी 2005 में, पाकिस्तान के पश्चिमोत्तर सीमांत प्रांत की सरकार ने एक अधिसूचना जारी कर क़ैदियों को जेल के भीतर साल में 3 दिन अपनी पत्नियों के साथ रहने की अनुमति दी थी, जिसका व्यापक स्तर पर स्वागत किया गया था....Yahan main batana chahunga ki islamic qanoon mein ye pravadhaan hai ki kam se kam 4 maah mein aik baar pati apni patni ke saath waqt bitaaye chahein wo kisi jung mein hi kyon na gaya ho jaisa ki aap sabhi ko maaloom hai pahle ke wakt mein junge hua karti thi aur fauzi kai kai maheene apni patniyon se door raha karte the...agar pakistaani home ministry ne ise kaidiyon ke liye lagoo kiya hai to kattai ye na samjha jaye ki wahan k kaidiyon ko ye sahoolat di jaa rahi hai balki pakistaani home ministry ka faisla aurton ke haq k liye islamic qanoon se parerit ho sakta hai..aik tarah se ye buraiyan na phaile auratein badkaar na ho is sandarbh mein faisle ka swagat kiya jaana chahiye..magar kaidi is se labhanwit honge is sandarbh mein ye durust nahi......

Anurag Sharma ने कहा…

जेल होता ही क्यों है...? लोगों को समाज से दूर रखने के लिए... पाकिस्तान वैसे भी आबादी की समस्या से जूझ रहा है... ऐसे में ये एक गलत पहल।