मंगलवार, 12 अगस्त 2008

हिन्दुस्तान: धमाकों का देश

!!8 साल 69 से अधिक जिहादी धमाके,1200 से अधिक मौतें!!
हिन्दुस्तान: धमाकों का देश
सोने की चिडिया,जगत का सिरमौर हमारा हिन्दुस्तान आज जिहादियों की ऐशगाह और शांतिप्रिय नागरिकों की मौतगाह बनता जा रहा है. कभी जम्मू कश्मीर,असम,छत्तीसगढ़,मध्य प्रदेश जैसे राज्यों तक सिमटा जिहादी आतंकवाद आज देशव्यापी हो गया है.तो ऐसे में क्या दिल्ली,क्या वाराणसी,क्या हैदराबाद,क्या जयपुर और क्या अहमदाबाद?सब बराबर हो गया है.कभी कभी लगता है कि समानता और समरसता की जो भावना सदियों से आजतक हम हिन्दुस्तानियों में नही जागृत हो पाई आज वो जिहादियों ने पैदा कर दी.आज की तारीख में पूरा हिन्दुस्तान एक समान हो गया है क्योंकि मौत हर जगह बराबर में मिलती है. आइये पिछले तीन सालों के आंकडों पर नजर डालें-
तारीख वर्ष जगह मौतें
१. २५ अगस्त २००५ मुंबई ४६
२. २९ अक्तूबर २००५ दिल्ली
. ७ मार्च २००६ वाराणसी २१ ४. ११ जुलाई २००६ मुंबई २०९५. ८ सितम्बर २००६ मालेगांव ४०६. १९ फरवरी २००७ पानीपत ६६७. १८ मई २००७ हैदराबाद १२८. २५ अगस्त २००७ हैदराबाद ४२९. १३ मई २००८ जयपुर ६३१०.२५ जुलाई २००८ बंगलौर ०१ ११. २६ जुलाई २००८ अहमदाबाद ५३
ये आंकड़े इस बात को चीख चीख कर बयां कर रहे हैं कि अब हिंदुस्तान सुरक्षित नहीं रहा.एक चौंकाने वाला तथ्य यह है कि इस्लामी आतंकी गतिविधियों में होने वाली मौतों में पूरे विश्व में हिन्दुस्तान का इराक़ के बाद दूसरा स्थान है,जो हमें नख से शिख तक शर्मसार कर देने के लिए काफ़ी है. बात करें हमारे रहनुमाओं की तो आज भी उनकी प्रतिक्रियाएं वैसी ही हैं जैसे पहले आती थीं.जब वे सत्ता में होते हैं तो जिहाद का रोना रोते हैं और मुआवजे बाँटते हैं और जब विपक्ष में होते हैं तो आरोपों की झडी लगा देते हैं.पर हकीकत यह है कि हैं सभी एक ही तवे के सेंके हुए. फ़िर भी हम बात करते हैं सर्वशक्तिमान बनने की,अमेरिका की बराबरी करने की,अरे, हमें तो किसी गटर में डूब मरना चाहिए.क्या आपको नहीं पता है कि ९/११ के बाद अमेरिका में जिहाद के नाम पर पटाखे तक नही फूटे वहीँ इस दरम्यान हमारे देश में तकरीबन १२०० लोग जिहाद के नाम पर हलाक हो गए.ये फर्क है सर्वशक्तिमान अमेरिका और शेखचिल्ली सा ख्वाब सजाये हिन्दुस्तान में. कहते हैं हर अति की इति होती है,पर यह क्या,यहाँ तो किसी के कान पर जूं तक नहीं रेंगती.सभी मस्त हैं अपनी राजनीति बजाने में.कोई अमरनाथ श्राईन बोर्ड मसाले पर,कोई सेतुसमुद्रम पर,कोई नंदीग्राम पर तो कोई कलावती पर. आख़िर,हम गुहार लगायें तो किससे?जागो अब तो जागो....
आज अगर खामोश रहे तो कल सन्नाटा छायेगा,
हर बस्ती में आग लगेगी,हर बस्ती जल जाएगा।
सन्नाटों के पीछे से तब एक सदा ये आयेगी।
कोई नही है,कोई नही है,कोई नही है कोई नही.
आलोक सिंह "साहिल"

2 टिप्‍पणियां:

mahendra mishra ने कहा…

आज अगर खामोश रहे तो कल सन्नाटा छायेगा,
हर बस्ती में आग लगेगी,हर बस्ती जल जाएगा।
सन्नाटों के पीछे से तब एक सदा ये आयेगी।
कोई नही है,कोई नही है,कोई नही है कोई नही.
apke vicharo se sahamat hun .bahut badhiya post dhanyawaad,.

Udan Tashtari ने कहा…

आज अगर खामोश रहे तो कल सन्नाटा छायेगा,
हर बस्ती में आग लगेगी,हर बस्ती जल जाएगा।
सन्नाटों के पीछे से तब एक सदा ये आयेगी।
कोई नही है,कोई नही है,कोई नही है कोई नही.

-सटीक!!