शुक्रवार, 12 सितंबर 2008

१४४० मिनट....११३२ शिलाएं!!

दुनिया बहुत ही रंग-बिरंगी है।कब कहा क्या देखने सुनने को मिल जाए अंदाजा लगा पाना बहुत मुश्किल।ऐसा ही कुछ गुजरा आज मध्य प्रदेश के सागर के रहेली में,जहाँ के विधायक गोपाल भार्गव ने कर डाले एक ही साथ(एक ही दिन में,महज ८६४०० सेकेंड्स या यूँ कहें १४४० मिनटों में) ११३२ परियोजनाओं के शिलान्यास।मान्यवर भार्गव हाल फिलहाल एम।पी। के कृषि मंत्री हैं,साथ ही अन्य दो विभागों की जिम्मेदारी भी उनके मजबूत कन्धों पर है. बात करें अतीत की तो, भार्गव साहब, सन १९८५ से ही रहेली से विधायक बनते आ रहे हैं पर आज भी वहां सड़क,स्कूल,अस्पताल जैसी बुनियादी सुविधाओं का खासा अभाव है,आज तक जब कुछ नही हुआ तो फ़िर क्या जरुरत आन पड़ी कि उन्होंने एक ही दिन में इतने सारे शिलान्यास कर डाले? मुद्दा,या फ़िर बात यह नहीं कि महज एक दिन में किए गए इतने परियोजनाओं के लिए आवंटित फकत २०० करोड़ रुपयों से क्या कुछ हो पायेगा,बात दरअसल यह है कि जो काम आज तक नही कर पाये वो अभी यकायक इतनी जल्दबाजी में क्यों?कहीं ये कोई सियासी मज़बूरी तो नही? जी हाँ,आपको याद दिला दें कि आने वाले नवम्बर महीने में वहाँ विधान सभा के चुनाव होने वाले हैं.तो,अगर उन्होंने सारे शिलान्यास नहीं किए तो फ़िर चुनाव आचार संहिता आड़े आ जायेगी.समस्या फ़िर भी यथावत कि विधायक तो पिछले पौने पॉँच सालों से हैं फ़िर अभी क्यों? यह जानने के लिए जरुरत है इस मामले को एक नौटंकी से परे हटकर देखने की.ऐसा करने पर हम पाएंगे कि इन सबके पीछे कहीं न कहीं हम भारतीय ख़ुद ही जिम्मेदार हैं.चौंकिए मत! एक सवाल का जवाब दीजिये, सब आसान हो जाएगा.आज तक के भारतीय इतिहास में एक-आध अपवाद घटनाओं(दुर्घटनाओ) को छोड़ दें तो कौन सा ऐसा चुनाव है जो विकास कार्यों के नाम पर जीता गया? आज की तारीख में कौन सा ऐसा नेता है जो फकत विकास कार्यों के नाम पर चुनाव जितने का माद्दा रखता है? जवाब- शायद,शायद क्या,कोई नहीं. अब कारण क्या है?अन्य देशों में तो ऐसा होता है फ़िर हमारे यहाँ क्यों नहीं?दरअसल, हम भारतीयों की याददाश्त बहुत ही कमजोर होती है,हमें बड़ी से बड़ी घटनाओं को भुला देने के लिए चंद हफ्ते या महीने ही काफ़ी होते हैं.ऐसे में कोई भी राजनीतिक शख्स जब कोई अच्छा कम तभी करता है जब चुनावी तौर पर कोई फायदा होने वाला हो. पर एक समस्या अब भी बची रह गई,की ठीक है काम करना था तो करते पर इतने सारे की क्या जरुरत थी? साधारण सी बात है.क्या आपको लगता है,सिर्फ़ २०० करोड़ रुपयों और फकत २ महीनो में सारे काम पूरे हो जायेंगे?अगर ऐसा लगता है तो माफ़ कीजियेगा पर आपको बहुत ग़लत लगता है. बात यह है कि,भार्गव साहब को पता है चुनाव होने तक में कोई भी परियोजना पूरी नहीं हो पाने वाली फ़िर फायदा क्या,तो उन्होंने उठा लिया एक ऐतिहासिक कदम.लोग काम के लिए न सही कम से कम इतनी बड़ी घटना के रूप में तो याद रखेंगे ही,और इतना काफ़ी है उनकी चुनावी नैया पार हो जाने के लिए.और चाहिए भी क्या? भगवान,उनकी इस नेक कामना को पूर्ण करे.

आलोक सिंह "साहिल"

6 टिप्‍पणियां:

keshu ने कहा…

शानदार,मजेदार और झख्झोर देने वाला.ख़ुद को आइना दिखाता लेख.

रंजना [रंजू भाटिया] ने कहा…

चुनाव का खेल है सब जी ...यही चाल कब से सब नेता गण चलते हैं ..चलिए जनता का क्या भला होगा इस में ..भगवान इनका भला करे ..यही कह सकते हैं ...जोरदार लिखा है .

जितेन्द़ भगत ने कहा…

sahi kaha aapne, ye sab chunao se pehley ki हुड़दंग hai

seema gupta ने कहा…

" interetsing to read, "

Regards

seema gupta ने कहा…

" interetsing to read, "

Regards

आपकी आवाज ने कहा…

hello alok ji it is nice yar .. bas i want to follo u.... good effort be continue.... i am with u....